विनायक चतुर्थी
🗓️ शुक्ल चतुर्थी तिथि (मासिक)
The story behind विनायक चतुर्थी
विनायक चतुर्थी हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है — संकष्टी का शुक्ल पक्षीय रूप। जहाँ संकष्टी संकटों से मुक्ति के लिए रखी जाती है, वहीं विनायक चतुर्थी बुद्धि, नए आरंभ और सफलता के लिए रखी जाती है, और इसकी पूजा मध्याह्न में होती है। भाद्रपद की गणेश चतुर्थी बारहों में सबसे भव्य है; मासिक व्रत वही पूजन वर्ष भर बनाए रखता है। परंपरा इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की सलाह देती है।
विनायक चतुर्थी Puja Vidhi
- 1
प्रातः संकल्प
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और मध्याह्न पूजा पूर्ण होने तक केवल फल या जल लेते हुए व्रत का संकल्प लें।
- 2
मध्याह्न गणेश पूजा
मध्याह्न में गणेश प्रतिमा स्थापित या स्वच्छ करें, दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर और 21 मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- 3
गणपति अथर्वशीर्ष
गणपति अथर्वशीर्ष या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें, फिर आरती करें।
- 4
पारण
मध्याह्न पूजा के बाद प्रसाद से व्रत खोलें; उस रात चंद्रमा को देखने से बचें।
विनायक चतुर्थी Mantra
ॐ गं गणपतये नमः॥
Meaning
गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।
How to chant
मध्याह्न पूजा में 108 बार जप करें, प्रत्येक 21वें जप पर एक दूर्वा अर्पित करते हुए।
