एकादशी व्रत
🗓️ प्रत्येक पक्ष की एकादशी तिथि (माह में दो बार)
The story behind एकादशी व्रत
एकादशी प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है और भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पावन व्रत मानी जाती है। इस व्रत के पालन से संचित कर्मों का शमन होता है और मन ध्यान हेतु स्थिर होता है। यह प्रत्येक चंद्र मास में शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में एक-एक बार आती है।
एकादशी व्रत Puja Vidhi
- 1
दशमी नियम
दशमी तिथि को केवल एक सात्विक भोजन करें तथा वाणी व कर्म में संयम बरतें।
- 2
निर्जल या फलाहार व्रत
पूरे दिन निर्जल उपवास करें अथवा फलाहार व दूध ग्रहण करते हुए अन्न-दाल का त्याग करें।
- 3
विष्णु पूजन एवं तुलसी अर्पण
भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प व दीप अर्पित करें तथा विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें।
- 4
पारण विधि
अगले दिन द्वादशी को निर्धारित पारण काल में व्रत खोलें तथा यथाशक्ति दान करें।
एकादशी व्रत Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Meaning
सर्वव्यापी भगवान वासुदेव को प्रणाम।
How to chant
व्रत के दिन विष्णु पूजन के समय 108 बार जप करें।
