मासिक शिवरात्रि
🗓️ निशीथ काल में कृष्ण चतुर्दशी तिथि (मासिक)
The story behind मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि हर माह की कृष्ण चतुर्दशी को, अमावस्या से एक रात पूर्व, मनाई जाती है — जब चंद्रमा सबसे क्षीण होता है और निशिता काल की मध्यरात्रि में शिव का पूजन होता है। फाल्गुन की महाशिवरात्रि इसी व्रत का वार्षिक रूप है; मासिक व्रत उसी अनुशासन को वर्ष भर बनाए रखता है। शिव पुराण के अनुसार जो रात्रि जागरण के साथ प्रत्येक मासिक शिवरात्रि रखता है, वह भय से मुक्त होता है और शांत मन पाता है।
मासिक शिवरात्रि Puja Vidhi
- 1
दिन का उपवास एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और अगली सुबह तक केवल फल, दूध या जल लेते हुए व्रत का संकल्प लें।
- 2
सायं अभिषेक
सूर्यास्त के बाद शिवलिंग को जल, दूध, दही, शहद और घी से स्नान कराएँ तथा बिल्वपत्र, श्वेत पुष्प और भस्म अर्पित करें।
- 3
निशिता काल पूजा
मध्यरात्रि के आसपास, जो इस व्रत का मर्म है, पुनः अभिषेक करें और पंचाक्षरी मंत्र या शिव चालीसा का पाठ करें; अनेक भक्त रात्रि के चारों प्रहर जागरण करते हैं।
- 4
प्रातः पारण
अगले दिन सूर्योदय के बाद, चतुर्दशी तिथि समाप्त होने पर, सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
मासिक शिवरात्रि Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
Meaning
कल्याणकारी भगवान शिव को नमस्कार।
How to chant
रात्रि के चारों प्रहरों में 108-108 बार जप करें, या कम से कम निशिता काल पूजा के समय।
