आज का पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ मुहूर्त — आपके स्थान के अनुसार गणना की गई।
📍आपका स्थान
लाइव स्थान असमर्थआपने अपना लाइव स्थान साझा नहीं किया है। वर्तमान में पंचांग गणना के लिए नई दिल्ली का उपयोग हो रहा है।
७ शुभ एवं अशुभ काल (मुहूर्त)
सूर्योदय के आधार पर शुभ और अशुभ समय की अवधि।
चौघड़िया
दिन और रात की आठ अवधियाँ, और प्रत्येक किस कार्य के लिए उपयुक्त है।
- रोगMars06:02 – 07:36अशुभ समय
- उद्वेगSun07:36 – 09:10अशुभ समय
- चरVenus09:10 – 10:44सामान्य
- लाभMercury10:44 – 12:18शुभ समय
- अमृतMoon12:18 – 13:52शुभ समय
- कालSaturn13:52 – 15:26अशुभ समय
- शुभJupiter15:26 – 17:00शुभ समय
- रोगMars17:00 – 18:34अशुभ समय
- कालSaturn18:34 – 20:00अशुभ समय
- लाभMercury20:00 – 21:26शुभ समय
- उद्वेगSun21:26 – 22:52अशुभ समय
- शुभJupiter22:52 – 00:18शुभ समय
- अमृतMoon00:18 – 01:44शुभ समय
- चरVenus01:44 – 03:11सामान्य
- रोगMars03:11 – 04:37अशुभ समय
- कालSaturn04:37 – 06:03अशुभ समय
वैदिक सौर एवं चंद्र चक्र
स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि के आधार पर दिन-रात का चक्र और चंद्र कला।
☀️ सूर्य मार्ग
🌙 चंद्र कला
आज का पंचांग
आज के पांच वैदिक तत्व — पंचांग स्थिति के आधार पर।
आज · मंगलवार, 8 सितंबर 2026३० वैदिक तिथियां एवं प्राकृतिक ऊर्जाएं
सभी ३० चंद्र दिवसों (तिथियों) का अध्ययन करें, जिन्हें १५ दिन शुक्ल पक्ष (बढ़ता प्रकाश) और १५ दिन कृष्ण पक्ष (आत्मचिंतन) में विभाजित किया गया है, साथ ही उनके स्वामी देवता एवं वैदिक सलाह।
धार्मिक अनुष्ठानों, वास्तु पूजा और नए व्रतों के शुभारंभ के लिए उत्तम।
नींव रखने, विवाह की तैयारियों और वित्तीय पहलों के लिए शुभ।
कला, संगीत, सौंदर्य अनुष्ठानों और धन वृद्धि के लिए अत्यंत लाभदायक।
भगवान गणेश को समर्पित। विघ्न निवारण, रणनीति बनाने और बाधाओं पर विजय के लिए उत्तम।
शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक दीक्षा के लिए श्रेष्ठ।
साहस, नेतृत्वकर्ताओं से भेंट, खेल और नई परियोजनाओं की शुरुआत के लिए अनुकूल।
भगवान सूर्य का आशीर्वाद। स्वास्थ्य, यात्रा, वाहन क्रय और नेतृत्व के लिए उत्तम।
मां दुर्गा को समर्पित। आध्यात्मिक साधना, व्रत और शक्ति संचय के लिए उत्तम।
मां दुर्गा एवं श्री राम की कृपा। प्रतियोगी प्रयासों और रणनीति के लिए उपयुक्त।
पुण्य कर्मों, करियर वृद्धि और धर्मपरायण कार्यों के लिए शुभ।
भगवान विष्णु का परम पवित्र व्रत दिवस। मन, शरीर और कर्मों का शोधन करता है।
दान, पवित्र स्नान, समाज सेवा और धार्मिक संकल्पों की पूर्ति के लिए अनुकूल।
प्रदोष काल। मित्रता, संबंधों और भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ।
पूर्णिमा पूर्व गहन साधना काल। मंत्र जाप, ध्यान और आत्म-नियंत्रण के लिए उत्तम।
पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र प्रकाश)। ध्यान, सत्यनारायण कथा और समृद्धि हेतु सर्वोच्च ऊर्जा।
