पूर्णिमा व्रत
🗓️ शुक्ल पूर्णिमा तिथि (मासिक)
The story behind पूर्णिमा व्रत
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि, हर माह उपवास और अनेक घरों में सत्यनारायण कथा के साथ मनाई जाती है। पूर्ण चंद्र का समय मन के लिए सबसे ग्रहणशील माना गया है, इसलिए दान, जप और चंद्रमा के नीचे रात्रि जागरण विशेष फलदायी कहे गए हैं। गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा — ये सब इसी व्रत के विशेष नाम हैं।
पूर्णिमा व्रत Puja Vidhi
- 1
प्रातः संकल्प
सूर्योदय से पूर्व स्नान करें, संभव हो तो नदी में या जल में गंगाजल मिलाकर, और चंद्र दर्शन तक व्रत का संकल्प लें।
- 2
विष्णु या सत्यनारायण पूजा
तुलसी, पीले पुष्प और पंचामृत से भगवान विष्णु का पूजन करें; अनेक परिवार संध्या में सत्यनारायण कथा पढ़ते हैं।
- 3
चंद्र अर्घ्य
चंद्रोदय के बाद जल और दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें तथा चंद्र मंत्र का जप करें।
- 4
दान एवं पारण
अन्न या वस्त्र का दान करें, फिर चंद्र अर्घ्य के बाद सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
पूर्णिमा व्रत Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Meaning
सर्वव्यापी भगवान वासुदेव को नमस्कार।
How to chant
पूजा के समय 108 बार जप करें; सत्यनारायण पूर्णिमा पर कथा के प्रत्येक अध्याय से पूर्व इसका पाठ करें।
