प्रदोष व्रत
🗓️ प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि (माह में दो बार)
The story behind प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित संध्याकालीन प्रदोष काल में मनाया जाता है। इस समय शिव पूजन से पापों का नाश, रोगों का शमन और धर्मानुकूल इच्छाओं की पूर्ति मानी जाती है।
प्रदोष व्रत Puja Vidhi
- 1
दिन भर उपवास
संध्या पूजन तक फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें और अन्न ग्रहण न करें।
- 2
सायं स्नान एवं सज्जा
देर दोपहर पुनः स्नान करें तथा प्रदोष काल आरंभ होने से पूर्व स्वच्छ, संभवतः श्वेत वस्त्र धारण करें।
- 3
प्रदोष काल में शिवाभिषेक
सूर्यास्त के लगभग 90 मिनट पूर्व व पश्चात उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग पर जल व दूध से अभिषेक करें।
- 4
आरती एवं पारण
शिव आरती के पश्चात सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें।
प्रदोष व्रत Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
Meaning
कल्याणकारी भगवान शिव को नमस्कार।
How to chant
प्रदोष काल में अभिषेक के समय 108 बार जप करें।
