पोहेला बोइशाख (बंगाली नववर्ष)
🗓️ सूर्य का मेष राशि में प्रवेश — बोइशाख का पहला दिन (मध्य अप्रैल)
The story behind पोहेला बोइशाख (बंगाली नववर्ष)
पोहेला बोइशाख बोइशाख मास की प्रथम तिथि को बंगाली वर्ष का आरंभ करता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसकी विशिष्ट परंपरा व्यापारिक है: हाल खाता, जब व्यापारी पुराने वर्ष की बही बंद कर, गणेश और लक्ष्मी के पूजन के पश्चात नई खोलता है, और ग्राहकों को मिष्ठान्न सहित लेखा निपटाने बुलाता है। दिन का स्वागत प्रभात फेरी और 'एशो हे बोइशाख' के गायन से होता है। यह पश्चिम बंगाल, असम की बराक घाटी और बांग्लादेश में सभी समुदायों के बंगालियों द्वारा मनाया जाता है।
पोहेला बोइशाख (बंगाली नववर्ष) Puja Vidhi
- 1
स्नान व अल्पना
प्रातः स्नान कर नए वस्त्र धारण करें, और देहरी पर अल्पना बनाकर जल, आम पत्ते व नारियल सहित मंगल घट स्थापित करें।
- 2
गणेश-लक्ष्मी पूजन
आने वाले वर्ष हेतु भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी का पूजन घर अथवा प्रतिष्ठान में करें।
- 3
हाल खाता
पूजन के पश्चात पिछले वर्ष की बही बंद कर नई खोलें, और प्रथम प्रविष्टि से पूर्व उस पर सिंदूर व स्वस्तिक अंकित करें।
- 4
मिष्टि व निमंत्रण
ग्राहकों, पड़ोसियों और स्वजनों को आमंत्रित करें, मिष्ठान्न वितरित करें, और नववर्ष का भोजन साथ करें।
पोहेला बोइशाख (बंगाली नववर्ष) Mantra
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
Meaning
महालक्ष्मी को नमस्कार, जो नववर्ष के लेखा आरंभ पर आवाहित की जाती हैं।
How to chant
हाल खाता पूजन में, नई बही की प्रथम प्रविष्टि से पूर्व जप करें।
