हनुमान जयंती
🗓️ चैत्र पूर्णिमा (मार्च–अप्रैल)
The story behind हनुमान जयंती
हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को भगवान हनुमान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है, जो अंजना और वायु के पुत्र तथा भगवान राम के अग्रगण्य भक्त हैं। परंपरा उन्हें चिरंजीवियों में गिनती है, जो वहाँ उपस्थित रहते हैं जहाँ रामायण का पाठ होता है। दक्षिण और पश्चिम के कुछ क्षेत्रों में उनकी जयंती अन्य तिथियों को मनाई जाती है — तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या, कर्नाटक और आंध्र के भागों में वैशाख कृष्ण दशमी — अतः चैत्र पूर्णिमा उत्तर भारतीय एवं अखिल भारतीय गणना है, एकमात्र नहीं।
हनुमान जयंती Puja Vidhi
- 1
ब्रह्म मुहूर्त स्नान व संकल्प
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर संकल्प लें; अनेक व्रती इस दिन फलाहार और दूध का व्रत रखते हैं।
- 2
सिंदूर व चोला अर्पण
चमेली के तेल में मिश्रित सिंदूर प्रतिमा पर अर्पित करें, जो हनुमान जी को प्रिय पारंपरिक अर्पण है, साथ ही लाल वस्त्र और लाल पुष्पों की माला चढ़ाएँ।
- 3
सुंदरकांड अथवा चालीसा पाठ
घी का दीप प्रज्वलित कर प्रतिमा के समक्ष रामचरितमानस के सुंदरकांड अथवा हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- 4
नैवेद्य व भंडारा
बूँदी लड्डू, केला अथवा गुड़-चना का नैवेद्य अर्पित कर प्रसाद वितरित करें; इस दिन अन्न वितरण को मुख्य माना गया है।
हनुमान जयंती Mantra
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥
Meaning
हनुमान जी का पारंपरिक बीज मंत्र, जो उन्हें रुद्र के अंश रूप में आवाहित करता है।
How to chant
लाल आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर सुंदरकांड पाठ से पूर्व 108 बार जप करें।
