उगादि (तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष)
🗓️ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — चंद्र नववर्ष (मार्च–अप्रैल)
The story behind उगादि (तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष)
उगादि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चंद्र वर्ष का आरंभ करती है — नाम युग और आदि से बना है, अर्थात युग का आरंभ, वही तिथि जिस पर परंपरा मानती है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि आरंभ की। इसकी पहचान उगादि पच्चड़ी है, जो एक साथ छह रसों से बनती है: कड़वाहट के लिए नीम, मिठास के लिए गुड़, नमक, इमली, कच्चा आम और मिर्च। वर्ष के प्रथम प्रभात में इसे ग्रहण करना वर्ष की शर्तें स्पष्ट कह देता है — छहों आएँगे, और साथ ही स्वीकार करने हैं।
उगादि (तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष) Puja Vidhi
- 1
अभ्यंग स्नान व तोरण
सूर्योदय से पूर्व तिल तेल से स्नान करें, नए वस्त्र धारण करें, और द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बाँधें।
- 2
उगादि पच्चड़ी
नीम के फूल, गुड़, नमक, इमली, कच्चा आम और मिर्च की पच्चड़ी बनाकर देव को अर्पित करें, और वर्ष का प्रथम आहार उसी से करें।
- 3
पंचांग श्रवण
मंदिर में अथवा किसी बुजुर्ग से नववर्ष पंचांग का श्रवण करें, जो वर्ष की गणना और फलादेश बताता है।
- 4
पूजन व भोजन
नववर्ष के संकल्प सहित इष्टदेव का पूजन करें, तत्पश्चात उत्सव भोजन ग्रहण करें — परंपरा अनुसार पुलिहोरा और बोब्बाटलु अथवा होलिगे सहित।
उगादि (तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष) Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Meaning
भगवान वासुदेव को नमस्कार — युग परिवर्तन पर, नववर्ष के आरंभ में आवाहित।
How to chant
प्रातः पूजन में, उगादि पच्चड़ी ग्रहण करने से पूर्व 108 बार जप करें।
