नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
🗓️ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, प्रदोष काल में (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
नरक चतुर्दशी दीपावली का दूसरा दिन है, जो भगवान कृष्ण और सत्यभामा द्वारा असुर नरकासुर के वध तथा उसके बंदी सोलह सहस्र कन्याओं की मुक्ति का स्मरण कराता है। इस दिन का प्रमुख आचरण अभ्यंग स्नान है — सूर्योदय से पूर्व तेल स्नान, जिसे गंगा स्नान के समान माना गया है, और जिससे इस दिन का दूसरा नाम रूप चतुर्दशी पड़ा। बंगाल में यही रात्रि काली चौदस है, जो माँ काली को समर्पित है। स्नान ही मर्म है: जो शुद्ध होता है वह केवल देह नहीं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) Puja Vidhi
- 1
अभ्यंग स्नान
सूर्योदय से पूर्व गर्म तिल अथवा नारियल तेल और बेसन-हल्दी का उबटन लगाकर स्नान करें — परंपरा अनुसार घर में यह स्नान ज्येष्ठता के क्रम से किया जाता है।
- 2
अपामार्ग व तिलक
स्नान से पूर्व परंपरा अनुसार अपामार्ग के पत्ते सिर के ऊपर घुमाएँ, और स्नान के पश्चात तिलक लगाएँ।
- 3
यम तर्पण
स्नान के पश्चात दक्षिणाभिमुख होकर यमराज को जल और तिल का तर्पण अर्पित करें, अकाल मृत्यु से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए।
- 4
संध्या दीप दान
संध्या को देहरी, तुलसी वृंदा और घर के कोनों में दीप जलाएँ, और एक दीप रात भर प्रज्वलित रखें।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) Mantra
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
Meaning
वासुदेव पुत्र कृष्ण को, हरि को, परमात्मा को, शरणागत के क्लेश हरने वाले गोविंद को बारंबार नमस्कार।
How to chant
अभ्यंग स्नान के समय तीन बार, और संध्या दीप दान के समय एक बार पाठ करें।
