गुड़ी पड़वा (मराठी नववर्ष)
🗓️ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — चंद्र नववर्ष (मार्च–अप्रैल)
The story behind गुड़ी पड़वा (मराठी नववर्ष)
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र और गोवा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वर्ष का आरंभ करती है। जिस गुड़ी से इसका नाम है वह दोपहर से पूर्व खिड़की या छत पर खड़ी की जाती है: बाँस की छड़ पर चमकीला रेशमी वस्त्र, नीम और आम के पत्तों की माला, बताशे, और शीर्ष पर उलटा ताँबे या चाँदी का कलश। इसे विजय की पताका और घर के स्थिर होने के चिह्न रूप में पढ़ा जाता है। यह दिन साढ़े तीन मुहूर्तों में गिना जाता है — वर्ष के वे साढ़े तीन दिन जो पूर्णतः शुभ हैं और जिन्हें पृथक गणना की आवश्यकता नहीं।
गुड़ी पड़वा (मराठी नववर्ष) Puja Vidhi
- 1
अभ्यंग स्नान व रंगोली
सूर्योदय से पूर्व तेल स्नान करें, नए वस्त्र धारण करें, देहरी पर रंगोली बनाएँ और द्वार के ऊपर आम व नीम के पत्तों का तोरण बाँधें।
- 2
गुड़ी उभारणी
दोपहर से पूर्व खिड़की या छत पर, द्वार के दाहिनी ओर गुड़ी खड़ी करें, शीर्ष पर कलश उलटा रखें; सूर्यास्त से पूर्व उसे उतार लें।
- 3
गुड़ी पूजन
खड़ी गुड़ी का हल्दी, कुंकुम, पुष्प और धूप से पूजन करें, और श्रीखंड-पूरी अथवा पूरन पोली का नैवेद्य अर्पित करें।
- 4
नीम प्राशन व पंचांग
नीम, गुड़, इमली और अजवाइन का मिश्रण प्रथम आहार रूप में ग्रहण करें, तत्पश्चात नववर्ष पंचांग का श्रवण करें।
गुड़ी पड़वा (मराठी नववर्ष) Mantra
ॐ ब्रह्मणे नमः॥
Meaning
भगवान ब्रह्मा को नमस्कार, जिन्होंने परंपरा अनुसार इसी तिथि पर सृष्टि आरंभ की।
How to chant
गुड़ी खड़ी करते समय पूर्वाभिमुख होकर जप करें।
