गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)
🗓️ कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)
गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन आती है और भगवान कृष्ण द्वारा सात दिन तक कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों तथा गोधन को इंद्र की वर्षा से बचाने का स्मरण कराती है। उन्होंने ब्रजवासियों से कहा था कि वे उस पर्वत और अपनी गायों का सम्मान करें — जो वास्तव में उनका पोषण करते थे — न कि किसी दूर के देवता का; यह पर्व उसी परिवर्तन को सहेजता है। अन्न का पर्वत, अन्नकूट, बनाकर अर्पित किया जाता है, और गायों को स्नान कराकर, माला पहनाकर पहले भोजन कराया जाता है।
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) Puja Vidhi
- 1
गोवर्धन रचना
आँगन में गोबर अथवा मिट्टी का छोटा पर्वत बनाएँ, उस पर टहनी, पुष्प और प्रज्वलित दीप रखें, और मध्य में कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
- 2
अन्नकूट नैवेद्य
चावल, दाल, सब्ज़ी, कढ़ी, पूरी और मिष्ठान्न — अनेक व्यंजनों का पर्वत बनाकर किसी के भोजन से पूर्व कृष्ण को अर्पित करें।
- 3
गो पूजन
गायों को स्नान कराएँ, मस्तक पर हल्दी-कुंकुम लगाएँ, माला पहनाएँ, और दिन के भोजन का प्रथम भाग उन्हें अर्पित करें।
- 4
परिक्रमा व प्रसाद
बनाए गए पर्वत की सात बार परिक्रमा करते हुए गोवर्धन आरती गाएँ, तत्पश्चात अन्नकूट प्रसाद रूप में वितरित करें।
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) Mantra
गोवर्धनधराधार गोकुलत्राणकारक। विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥
Meaning
हे गोवर्धनधारी, गोकुल के रक्षक, विष्णु की भुजा से उठाए गए — कोटि गौओं के दाता हों।
How to chant
आँगन में बनाए गोवर्धन की परिक्रमा के समय पाठ करें।
