धनतेरस (धन्वंतरि त्रयोदशी)
🗓️ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, प्रदोष काल में (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind धनतेरस (धन्वंतरि त्रयोदशी)
धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को दीपावली के पाँच दिनों का आरंभ करती है। यह दिन भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का है, जो देवताओं के वैद्य हैं और समुद्र मंथन से अमृत कलश लिए प्रकट हुए — इसीलिए यह दिन धन जितना ही आरोग्य का भी है। घरों में धातु का क्रय होता है, और संध्या को दक्षिण दिशा की ओर यम के निमित्त दीप जलाया जाता है। परंपरा में धनतेरस का 'धन' उत्तम स्वास्थ्य और सम्यक् आजीविका है, क्रय की गई धातु तो उसका प्रतीक मात्र है।
धनतेरस (धन्वंतरि त्रयोदशी) Puja Vidhi
- 1
धन्वंतरि पूजन
प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि का पीत पुष्प और गुड़ के नैवेद्य से पूजन करें, और परिवार के आरोग्य की प्रार्थना करें।
- 2
लक्ष्मी-कुबेर पूजन
नवक्रीत धातु, सिक्के अथवा बर्तन माँ लक्ष्मी और कुबेर के समक्ष रखें, और कुंकुम, अक्षत, कमल पुष्प व बताशे अर्पित करें।
- 3
यम दीपम
सूर्यास्त के पश्चात तिल के तेल का चार मुख वाला दीप देहरी पर दक्षिणाभिमुख रखें, जो अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु अर्पित होता है।
- 4
दीप प्रज्वलन
प्रवेश द्वार, तुलसी वृंदा और आँगन में दीप पंक्तियाँ प्रज्वलित करें, तथा प्रदोष काल में मुख्य द्वार खुला रखें।
धनतेरस (धन्वंतरि त्रयोदशी) Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
Meaning
अमृत कलश धारण करने वाले, समस्त रोगों के नाशक, त्रैलोक्यनाथ भगवान धन्वंतरि को नमस्कार, जो स्वयं श्रीमहाविष्णु हैं।
How to chant
प्रदोष काल के पूजन में उत्तराभिमुख होकर 21 अथवा 108 बार जप करें।
