चेटी चंड (सिंधी नववर्ष)
🗓️ चैत्र शुक्ल द्वितीया — चंद्र नववर्ष के अगले दिन (मार्च–अप्रैल)
The story behind चेटी चंड (सिंधी नववर्ष)
चेटी चंड चेत मास में सिंधी नववर्ष का आरंभ करती है, और भगवान झूलेलाल के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है, जो सिंधी समुदाय के इष्ट देव हैं और जल के अधिपति वरुण के अवतार माने जाते हैं। समुदाय इसे सिंधु तट पर मनाता था; 1947 के पश्चात यह उनके साथ चला, और अब मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में मनाया जाता है। जल इस आचरण के केंद्र में है — बहराणा साहिब, दीप लिए एक पात्र, शोभायात्रा में ले जाकर नदी अथवा समुद्र में विसर्जित किया जाता है।
चेटी चंड (सिंधी नववर्ष) Puja Vidhi
- 1
स्नान व संकल्प
सूर्योदय से पूर्व स्नान कर नववर्ष का संकल्प लें, परंपरा अनुसार नदी तट अथवा किसी प्रवाहित जल के समीप।
- 2
बहराणा साहिब
बहराणा साहिब तैयार करें — आटे के आधार पर रखा पात्र, जिसमें प्रज्वलित दीप, मिश्री, इलायची, फल और नारियल हों।
- 3
झूलेलाल पूजन व पलव
दीप प्रज्वलित कर भगवान झूलेलाल का पूजन करें, और समुदाय की स्तुति 'पलव' का पाठ करें।
- 4
शोभायात्रा व विसर्जन
छेज नृत्य और भजन के साथ बहराणा की शोभायात्रा निकालें, नदी अथवा समुद्र में विसर्जित करें, तत्पश्चात ताहिरी व चावल का प्रसाद बाँटें।
चेटी चंड (सिंधी नववर्ष) Mantra
ॐ वरुणाय नमः॥
Meaning
जल के अधिपति वरुण को नमस्कार, जिनका अवतार भगवान झूलेलाल माने जाते हैं।
How to chant
झूलेलाल पूजन में तथा बहराणा साहिब के विसर्जन के समय जप करें।
