भाई दूज (यम द्वितीया)
🗓️ कार्तिक शुक्ल द्वितीया (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind भाई दूज (यम द्वितीया)
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को दीपावली के पाँच दिनों का समापन करती है। परंपरा कहती है कि इसी दिन यमुना ने अपने भाई यम को घर बुलाकर अपने हाथों से भोजन कराया, और यम ने उन्हें वर दिया कि जो भाई इस तिथि पर बहन के घर भोजन करे वह अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो। रक्षा बंधन से भिन्न, यहाँ कर्तव्य उल्टी दिशा में चलता है: भाई बहन के पास जाता है, और बहन के हाथ का भोजन ही वास्तविक विधि है।
भाई दूज (यम द्वितीया) Puja Vidhi
- 1
यमुना व यम स्मरण
प्रातः स्नान करें, और यथासंभव पारिवारिक विधि से पूर्व यमुना तथा यम का पूजन कर दिन की कथा का स्मरण करें।
- 2
तिलक व आरती
बहन भाई के मस्तक पर रोली और अक्षत का तिलक लगाए, आरती उतारे, और नारियल अथवा पान अर्पित करे।
- 3
बहन के घर भोजन
भाई बहन के घर उसके हाथों से भोजन ग्रहण करे — यही इस दिन का मुख्य कर्म है, कोई सहायक विधि नहीं।
- 4
दक्षिणा व आशीर्वाद
भाई उपहार व दक्षिणा दे; दोनों में जो ज्येष्ठ हो वह आशीर्वाद दे, और परिवार शेष प्रसाद ग्रहण करे।
भाई दूज (यम द्वितीया) Mantra
ॐ यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च। वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च॥
Meaning
धर्मराज यम को, अंतक को, विवस्वान पुत्र को, काल को — जिसके समक्ष समस्त प्राणी लय को प्राप्त होते हैं — नमस्कार।
How to chant
तिलक के समय बहन द्वारा भाई की दीर्घायु की कामना से उच्चारित।
