बैसाखी / वैसाखी
🗓️ सूर्य का मेष राशि में प्रवेश — वैसाख का पहला दिन (मध्य अप्रैल)
The story behind बैसाखी / वैसाखी
बैसाखी तब आती है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, और यह पंजाब तथा हरियाणा का फसल पर्व है, जब रबी की गेहूँ कटती है। सिखों के लिए इसका एक दूसरा और बड़ा अर्थ है: 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा की स्थापना की, और यह नगर कीर्तन, अमृत संचार तथा गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ के साथ मनाया जाता है। हिंदू परिवार इसी दिन को सौर नववर्ष के रूप में नदी स्नान और दान के साथ मनाते हैं। कटे खेतों में भांगड़ा और गिद्दा होता है।
बैसाखी / वैसाखी Puja Vidhi
- 1
प्रातः स्नान
प्रातः स्नान करें, परंपरा अनुसार नदी अथवा सरोवर में, जो मेष संक्रांति का सूचक है।
- 2
सूर्य अर्घ्य व दान
पूर्वाभिमुख होकर उगते सूर्य को जल अर्पित करें, और नई फसल का अन्न जरूरतमंदों को दें।
- 3
गुरुद्वारा अथवा मंदिर दर्शन
अपनी परंपरा अनुसार कीर्तन व लंगर हेतु गुरुद्वारा, अथवा दिन के पूजन हेतु मंदिर जाएँ।
- 4
नया अन्न व सहभोज
नई फसल का प्रथम अन्न ग्रहण से पूर्व अर्पित करें, तत्पश्चात समुदाय के साथ उत्सव भोजन करें।
बैसाखी / वैसाखी Mantra
ॐ सूर्याय नमः॥
Meaning
सूर्य देव को नमस्कार, जिनके मेष प्रवेश से फसल और सौर नववर्ष आते हैं।
How to chant
उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय पूर्वाभिमुख होकर जप करें।
