अक्षय तृतीया
🗓️ वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल–मई)
The story behind अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को आती है। अक्षय अर्थात जो क्षीण न हो, और परंपरा मानती है कि इस दिन आरंभ किया गया अथवा दिया गया कुछ भी समाप्त नहीं होता। यह अबूझ मुहूर्तों में गिनी जाती है, जो बिना गणना के पूर्ण शुभ है, और इसी दिन भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को अक्षय पात्र दिया तथा परशुराम का प्राकट्य हुआ। इसका प्राचीन भाव कृषि से जुड़ा है — बुवाई ऋतु का आरंभ — और शास्त्र अन्न, जल तथा छाया के दान पर बल देते हैं।
अक्षय तृतीया Puja Vidhi
- 1
स्नान व संकल्प
सूर्योदय से पूर्व, यथासंभव प्रवाहित जल में स्नान करें, और दिन के दान का संकल्प लें।
- 2
विष्णु-लक्ष्मी पूजन
भगवान विष्णु का तुलसी से और माँ लक्ष्मी का कमल व कमलगट्टे से पूजन करें, तथा सत्तू, जौ अथवा पीत चावल का नैवेद्य अर्पित करें।
- 3
जल व अन्न दान
जरूरतमंद को जल, मिट्टी का घड़ा, पंखा, छत्र, सत्तू, जौ अथवा ऋतु फल अर्पित करें — इस तिथि का शास्त्रीय दान, जिसकी प्रत्येक वस्तु आते ग्रीष्म को सहज करती है।
- 4
शुभारंभ
जो कार्य टलता रहा हो उसे आरंभ करें — बुवाई, अध्ययन, नया बही-खाता, नया उपक्रम — क्योंकि इस दिन पृथक मुहूर्त की आवश्यकता नहीं।
अक्षय तृतीया Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Meaning
द्वादशाक्षर मंत्र — सर्वव्यापी भगवान वासुदेव को नमस्कार।
How to chant
प्रातः पूजन में, दिन का दान करने से पूर्व 108 बार जप करें।
