वैकुंठ एकादशी
🗓️ Margashirsha Shukla Ekadashi (Nov–Dec)
The story behind वैकुंठ एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाने वाली वैकुंठ एकादशी (मोक्षदा एकादशी) को वैष्णवों के लिए, विशेषकर दक्षिण भारत में, परम पावन माना जाता है। श्रीरंगम व तिरुमला जैसे मंदिरों में इस दिन 'वैकुंठ द्वार' खोला जाता है, जिससे होकर गुजरने वाले भक्तों को भगवान विष्णु की मोक्षदायिनी कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यह दिन कठोर व्रत, रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन के साथ मनाया जाता है।
वैकुंठ एकादशी Puja Vidhi
- 1
निर्जल अथवा फलाहार व्रत
पिछली संध्या से अगले सूर्योदय तक निर्जल या केवल फलाहार व्रत रखें।
- 2
विष्णु पूजन
भगवान विष्णु या कृष्ण को तुलसी दल, पीले पुष्प व घी के दीपक से पूजें।
- 3
वैकुंठ द्वार दर्शन
जहाँ यह परंपरा हो, वहाँ मंदिर में विशेष रूप से खुले वैकुंठ द्वार से होकर दर्शन करें।
- 4
जागरण
रात्रि जागरण कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ या भजन-कीर्तन करें।
वैकुंठ एकादशी Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Meaning
सर्वव्यापी परमेश्वर भगवान वासुदेव को नमस्कार।
How to chant
व्रत व रात्रि जागरण के समय तुलसी माला से 108 बार जप करें।
