तुलसी विवाह
🗓️ Kartik Shukla Dwadashi (Oct–Nov)
The story behind तुलसी विवाह
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे (जिन्हें वृंदा या लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है) का विधिवत विवाह शालिग्राम अथवा कृष्ण रूप में भगवान विष्णु से कराया जाता है। कार्तिक शुक्ल द्वादशी को, देवउठनी एकादशी के अगले दिन, जब भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा से जागते हैं, यह उत्सव मनाया जाता है और इसी दिन से विवाह का मांगलिक मुहूर्त प्रारंभ माना जाता है।
तुलसी विवाह Puja Vidhi
- 1
मंडप एवं सजावट
तुलसी के पौधे व शालिग्राम या विष्णु प्रतिमा को छोटे मंडप, गन्ने व गेंदे के फूलों से सजाएं।
- 2
कन्यादान विधि
विवाह मंत्रों के उच्चारण के साथ तुलसी व विष्णु को कन्यादान की भांति सूत्र से जोड़ें।
- 3
सिंदूर एवं आरती
तुलसी के पास सिंदूर अर्पित करें, घी का दीपक जलाकर विवाह आरती करें।
- 4
प्रसाद वितरण
गन्ने व आंवले से बनी मिठाइयाँ विवाह प्रसाद के रूप में अर्पित व वितरित करें।
तुलसी विवाह Mantra
तुलसी श्रीसखी शुभे पापहारिणि पुण्यदे। नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये॥
Meaning
हे शुभ तुलसी, लक्ष्मी की प्रिय सखी, पापनाशिनी, पुण्यदायिनी — नारद द्वारा स्तुत, नारायण के मन को प्रिय, तुम्हें नमस्कार।
How to chant
तुलसी की परिक्रमा करते समय या सिंदूर-पुष्प अर्पण के समय जप करें।
