जगन्नाथ रथ यात्रा
🗓️ आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (जून–जुलाई)
The story behind जगन्नाथ रथ यात्रा
रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को होती है, जब भगवान जगन्नाथ, उनके ज्येष्ठ भ्राता बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा पुरी के मंदिर से तीन विशाल काष्ठ रथों पर निकलकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं, और नौ दिन पश्चात लौटते हैं। रथ प्रतिवर्ष नई लकड़ी से बनाए जाते हैं और जनसमूह के हाथों से खींचे जाते हैं। यात्रा का मर्म गति की दिशा में है: देव गर्भगृह छोड़कर मार्ग पर आते हैं, जहाँ कोई भी बिना मंदिर में प्रवेश किए दर्शन कर सकता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा Puja Vidhi
- 1
स्नान व स्मरण
प्रातः स्नान कर यात्रा का स्मरण करें — इससे पूर्व की स्नान पूर्णिमा, और नौ दिन बाद बहुड़ा यात्रा के रूप में देवों की वापसी।
- 2
जगन्नाथ पूजन
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का तुलसी, पीत पुष्प व प्रज्वलित दीप से पूजन करें; जहाँ मंदिर समीप न हो वहाँ चित्र अथवा छोटी प्रतिमा से भी हो सकता है।
- 3
रथ सेवा
जहाँ यात्रा हो वहाँ रथ खींचने अथवा मार्ग की सफाई में सम्मिलित हों — परंपरा इसे तमाशा नहीं, सेवा मानती है।
- 4
नैवेद्य व प्रसाद
खिचड़ी, पोड़ा पीठा अथवा ऋतु फल नैवेद्य रूप में अर्पित कर वितरित करें; जगन्नाथ प्रसाद बिना किसी भेद के सबमें बाँटा जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा Mantra
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥
Meaning
जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ मेरे नेत्रों के पथ में आएँ — जगन्नाथाष्टकम् की यह पंक्ति।
How to chant
रथों के दर्शन के समय, अथवा घर में प्रतिमा के समक्ष पाठ करें।
