रक्षा बंधन
🗓️ श्रावण पूर्णिमा (अगस्त)
The story behind रक्षा बंधन
रक्षा बंधन श्रावण पूर्णिमा को आता है, जब बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। सर्वाधिक प्रचलित कथा माँ लक्ष्मी की है, जिन्होंने राजा बलि को रक्षासूत्र बाँधकर बल से नहीं, स्नेह से बाँधा और भगवान विष्णु को उनके दरबार से मुक्त कराया। इसी पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म भी होता है, जब यज्ञोपवीत का नवीनीकरण किया जाता है। सूत्र में स्वयं कोई शक्ति नहीं; वह तो दो व्यक्तियों के बीच घोषित और साक्षी-सहित रक्षा-कर्तव्य का चिह्न है, जो वर्ष में एक बार नवीन होता है।
रक्षा बंधन Puja Vidhi
- 1
स्नान व पूजा थाली
स्नान कर थाली में राखी, रोली, अक्षत, प्रज्वलित दीप और मिष्ठान्न सजाएँ, और मुहूर्त तक उसे ढककर रखें।
- 2
देव स्मरण
किसी को बाँधने से पूर्व प्रथम राखी कुलदेवता अथवा इष्टदेव को अर्पित करें, जिससे दिन की रक्षा सर्वप्रथम देव से माँगी जाए।
- 3
रक्षा बंधन
बहन तिलक कर, रक्षा मंत्र का उच्चारण करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधे और आरती करे। परंपरा अनुसार यह अपराह्न काल में, भद्रा टालकर किया जाता है।
- 4
दक्षिणा व भोजन
भाई उपहार देकर रक्षा का वचन कहे; तत्पश्चात परिवार सहभोज करे और प्रसाद वितरित करे।
रक्षा बंधन Mantra
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
Meaning
जिस बंधन से महाबली दानवेंद्र राजा बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधती हूँ — हे रक्षे, तू विचलित न हो, विचलित न हो।
How to chant
कलाई पर सूत्र बाँधते समय बहन द्वारा एक बार उच्चारित किया जाता है।
