दीपावली / महालक्ष्मी पूजन
🗓️ कार्तिक अमावस्या (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind दीपावली / महालक्ष्मी पूजन
दीपावली प्रकाश और समृद्धि का महाउत्सव है। यह भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के पश्चात अयोध्या आगमन तथा माता महालक्ष्मी व भगवान गणेश के पूजन का पर्व है। दीये जलाना अंतर्मन के अंधकार, निराशा और दरिद्रता को मिटाकर आत्मज्ञान के प्रकाश को जाग्रत करने का प्रतीक है।
दीपावली / महालक्ष्मी पूजन Puja Vidhi
- 1
प्रदोष काल तैयारी
घर को स्वच्छ कर मुख्य द्वार पर रंगोली, आम के पत्तों का तोरण और पुष्प सजाकर माता लक्ष्मी का स्वागत करें।
- 2
गणेश-लक्ष्मी पूजन
स्थिर लग्न व प्रदोष काल में भगवान गणेश और माता महालक्ष्मी का कमल पुष्प, खीर, व मिष्ठान्न से पूजन करें।
- 3
दीप प्रज्ज्वलन
पूजा वेदी, मुख्य द्वार, खिड़कियों और आंगन में 11, 21 या 51 तिल तेल या घी के मिट्टी के दीये (दीपक) प्रज्ज्वलित करें।
- 4
श्री सूक्त व मंगल कामना
श्री सूक्त या महालक्ष्मी अष्टक का पाठ करें तथा परिवार व पड़ोसियों में प्रसाद बांटकर सबका मंगल मांगें।
दीपावली / महालक्ष्मी पूजन Mantra
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद...॥ शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा...॥
Meaning
शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य व धन संपदा देने वाली दीप ज्योति को मेरा प्रणाम। माता महालक्ष्मी हम पर प्रसन्न हों।
How to chant
संध्या समय लक्ष्मी पूजन और मुख्य दीपक प्रज्ज्वलित करते हुए 11 या 108 बार जप करें।
