नाग पंचमी
🗓️ श्रावण शुक्ल पंचमी (जुलाई–अगस्त)
The story behind नाग पंचमी
नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग देवताओं — अनंत, वासुकि, शेष तथा उनके कुल — के पूजन का पर्व है। वैदिक परंपरा में सर्पों को धरती के जल और गुप्त निधियों का रक्षक माना गया है, और शेष वह शय्या हैं जिन पर भगवान विष्णु प्रलयकाल में शयन करते हैं। व्रती बाँबी, नागकल अथवा अंकित चित्र पर दूध, जल और पुष्प अर्पित करते हैं, और इस दिन भूमि को जोतने या खोदने से विरत रहते हैं। यह पर्व वर्षा ऋतु में आता है, जब सर्प जलमग्न बिलों से ऊँचे स्थानों की ओर आते हैं।
नाग पंचमी Puja Vidhi
- 1
स्नान व संकल्प
सूर्योदय से पूर्व स्नान कर इस दिन भूमि को अखंडित रखने का संकल्प लें — परंपरा अनुसार हल चलाना, खोदना अथवा भूमि तोड़ना वर्जित है।
- 2
नाग प्रतिमा पूजन
काष्ठ पटल पर हल्दी या चंदन से नाग आकृति अंकित करें, अथवा मंदिर के नागकल का आश्रय लें, और हल्दी, कुंकुम, अक्षत व दूर्वा अर्पित करें।
- 3
क्षीर अर्पण
बाँबी, नागकल अथवा अंकित चित्र पर दूध, जल एवं कमल या चमेली के पुष्प अर्पित करें। दूध प्रतिमा या बिल पर ही अर्पित करें, जीवित सर्प को कदापि न पिलाएँ।
- 4
नवनाग स्तोत्र पाठ
नवनाग श्लोक का पाठ करें, फिर खीर अथवा तिल-गुड़ का नैवेद्य अर्पित कर प्रसाद वितरित करें।
नाग पंचमी Mantra
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
Meaning
अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ और कंबल; शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक तथा कालिय — इन नौ नागराजों का नामपूर्वक स्मरण।
How to chant
अर्पण के समय श्लोक का तीन बार पाठ करें, और संध्या को नैवेद्य से पूर्व एक बार पुनः।
