करवा चौथ
🗓️ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अक्टूबर–नवंबर)
The story behind करवा चौथ
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, जब विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु सूर्योदय से पूर्व से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। दिन का आरंभ सरगी से होता है, सास द्वारा भेजा गया प्रभात पूर्व का आहार। संध्या को स्त्रियाँ एकत्र होकर कथा सुनती हैं और करवा — वह मिट्टी का पात्र जिससे व्रत का नाम है — मंडली में फेरती हैं। व्रत तभी खुलता है जब छलनी से चंद्र दर्शन हो जाए।
करवा चौथ Puja Vidhi
- 1
सरगी व संकल्प
सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करें — परंपरा अनुसार सास द्वारा भेजे फल, फेनी और मिष्ठान्न — और निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- 2
गौरी-शिव पूजन
संध्या को माँ गौरी, भगवान शिव और गणेश की स्थापना कर सिंदूर, चूड़ियाँ, पुष्प और प्रज्वलित दीप अर्पित करें।
- 3
कथा व करवा फेरी
अन्य व्रतियों के साथ एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनें, और परंपरा अनुसार भरे करवे को मंडली में फेरें।
- 4
चंद्र दर्शन व पारण
चंद्रोदय पर छलनी से चंद्र दर्शन करें, जल का अर्घ्य दें, फिर उसी छलनी से पति को देखकर उनके हाथ से जल लेकर व्रत खोलें।
करवा चौथ Mantra
ॐ गौर्यै नमः॥
Meaning
माँ गौरी को नमस्कार, जो परिवार के कल्याण और दीर्घायु हेतु आवाहित की जाती हैं।
How to chant
संध्या पूजन में, कथा से पूर्व 108 बार जप करें।
