होली / होलिका दहन
🗓️ फाल्गुन पूर्णिमा (मार्च)
The story behind होली / होलिका दहन
होली दिव्य प्रेम, उल्लास और भक्ति की विजय का महापर्व है। यह श्री राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और भक्त प्रह्लाद की भगवान नरसिंह की कृपा से होलिका पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। यह अहंकार के दहन और आत्मा के रंगों के प्रस्फूटन का प्रतीक है।
होली / होलिका दहन Puja Vidhi
- 1
होलिका दहन पूजन
पूर्णिमा की रात्रि होलिका अग्नि की पूजा करें तथा उसमें अहंकार और नकारात्मकता की आहुति दें।
- 2
अग्नि परिक्रमा
परिवार की सुख-शांति और रक्षा के लिए होलिका अग्नि की 3 या 7 परिक्रमा करें।
- 3
राधा-कृष्ण गुलाल अर्पण
धुलंडी की प्रातः सर्वप्रथम श्री राधा-कृष्ण के श्री चरणों में प्राकृतिक गुलाल अर्पित करें।
- 4
स्नेह और प्रसाद वितरण
पारंपरिक गुजिया व ठंडाई का प्रसाद बांटें तथा पुराने मनमुटाव भूलकर प्रेम से गले मिलें।
होली / होलिका दहन Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने...॥
Meaning
भगवान वासुदेव श्री कृष्ण को सादर प्रणाम। वे समस्त क्लेशों को दूर करने वाले परम गोविंद हैं।
How to chant
भगवान कृष्ण को गुलाल अर्पित करते समय 21 बार भाव से स्मरण करें।
