हरियाली तीज
🗓️ श्रावण शुक्ल तृतीया (जुलाई–अगस्त)
The story behind हरियाली तीज
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को आती है, जब वर्षा ऋतु ने धरती को हरा कर दिया होता है। यह पर्व माँ पार्वती के दीर्घ तप के पश्चात भगवान शिव से पुनर्मिलन का स्मरण कराता है, जिसे परंपरा एक सौ आठ जन्मों की भक्ति का फल मानती है। विवाहित स्त्रियाँ पति के कल्याण हेतु और अविवाहित कन्याएँ सुयोग्य वर की कामना से व्रत रखती हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में यह विशेष उल्लास से मनाया जाता है, जहाँ स्त्रियाँ हरे वस्त्र धारण कर, मेहंदी रचाकर, वृक्षों पर पड़े झूलों पर गीत गाती हैं।
हरियाली तीज Puja Vidhi
- 1
स्नान, श्रृंगार व संकल्प
सूर्योदय से पूर्व स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें, मेहंदी व लाख की चूड़ियाँ पहनें, और सामर्थ्य अनुसार निर्जला अथवा फलाहारी व्रत का संकल्प लें।
- 2
शिव-पार्वती पूजन
सजी हुई चौकी पर शिव, पार्वती और गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएँ स्थापित करें; शिव को बेलपत्र, धतूरा व श्वेत पुष्प तथा पार्वती को सिंदूर, चूड़ियाँ व हरी चुनरी अर्पित करें।
- 3
तीज कथा श्रवण
संध्याकाल में अन्य व्रतियों के साथ माँ पार्वती की तपस्या की तीज कथा का श्रवण करें।
- 4
झूला व पारण
सजे झूले पर तीज के गीत गाएँ, संध्या आरती करें, और चंद्रोदय के पश्चात नैवेद्य से व्रत का पारण करें।
हरियाली तीज Mantra
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
Meaning
उमा और महेश्वर को एक साथ नमन — शक्ति और शिव के अभिन्न योग को प्रणाम।
How to chant
संध्या पूजन के समय व्रत का संकल्प स्मरण करते हुए 108 बार जप करें।
