बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा)
🗓️ वैशाख पूर्णिमा (अप्रैल–मई)
The story behind बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा)
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा को आती है और उन तीन घटनाओं का स्मरण कराती है जिन्हें परंपरा एक ही तिथि पर रखती है: लुंबिनी में सिद्धार्थ का जन्म, बोधगया में उनका सम्बोधि लाभ, और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेसाक नाम से ज्ञात यह भारत में राजपत्रित अवकाश है, और बोधगया, सारनाथ तथा सांची में पाठ, परिक्रमा एवं दीप अर्पण के साथ मनाया जाता है। वैष्णव गणना में बुद्ध भगवान विष्णु के दस अवतारों में गिने जाते हैं।
बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) Puja Vidhi
- 1
स्नान व व्रत संकल्प
प्रातः स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें, और इस दिन अहिंसा का संकल्प लें — मांस तथा वाणी की हिंसा दोनों से विरति।
- 2
दीप व पुष्प अर्पण
बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप, धूप और श्वेत पुष्प अर्पित करें, तथा जहाँ सुलभ हो वहाँ स्तूप अथवा बोधि वृक्ष की परिक्रमा करें।
- 3
पाठ व ध्यान
धम्मपद अथवा त्रिरत्न का पाठ करें या श्रवण करें, और यथासामर्थ्य ध्यान में बैठें।
- 4
दान व सेवा
जरूरतमंदों को अन्न, जल अथवा औषधि अर्पित करें, और बोधि या पीपल वृक्ष की जड़ों में जल दें — दान ही इस दिन की प्रमुख साधना है।
बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) Mantra
बुद्धं शरणं गच्छामि। धर्मं शरणं गच्छामि। सङ्घं शरणं गच्छामि॥
Meaning
मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ; मैं धर्म की शरण जाता हूँ; मैं संघ की शरण जाता हूँ — त्रिरत्न, तीन शरण।
How to chant
दिन के आचरण के आरंभ में, दीप अर्पण से पूर्व तीन बार उच्चारित करें।
