वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा)
🗓️ माघ शुक्ल पंचमी (जनवरी–फ़रवरी)
The story behind वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा)
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को आती है और वसंत ऋतु का शुभारंभ करती है। यह दिन माँ सरस्वती को समर्पित है, जो वाणी, विद्या और कलाओं की अधिष्ठात्री हैं, और जिनका पूजन पीत वर्ण में होता है — सरसों के फूलों और स्वयं ऋतु का रंग। यह दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जो बिना गणना के ही पूर्ण शुभ है, और परंपरा से बालक के विद्यारंभ — प्रथम अक्षर लेखन — के लिए चुना जाता है। बंगाल, ओडिशा और असम में यह घरों और विद्यालयों में सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है।
वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) Puja Vidhi
- 1
स्नान व पीत वस्त्र
प्रातः स्नान कर पीत वस्त्र धारण करें, और जिस चौकी पर देवी स्थापित हों उस पर पीला वस्त्र बिछाएँ।
- 2
सरस्वती पूजन
माँ सरस्वती की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें, और पीत पुष्प, हल्दी, अक्षत तथा केसरिया भात या बूँदी का नैवेद्य अर्पित करें।
- 3
पुस्तक व वाद्य पूजन
पुस्तकें, लेखनी और वाद्य यंत्र देवी के समक्ष रखकर उनका पूजन करें; परंपरा अनुसार पूजन पूर्ण होने तक उनका उपयोग नहीं किया जाता।
- 4
विद्यारंभ
छोटे बालकों से देवी के समक्ष स्लेट अथवा अन्न पर, किसी बड़े के हाथ के सहारे, प्रथम अक्षर लिखवाएँ।
वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) Mantra
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
Meaning
जो कुंद पुष्प, चंद्र और तुषार हार सी धवल हैं, श्वेत वस्त्र धारिणी हैं, जिनका कर वीणा से सुशोभित है, जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं — वे समस्त जड़ता हरने वाली भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें।
How to chant
पूजन के आरंभ में, और इस दिन किसी भी अध्ययन से पूर्व पाठ करें।
