शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा)
🗓️ आश्विन पूर्णिमा (सितंबर–अक्टूबर)
The story behind शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा)
शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को आती है — वह एक रात्रि जब परंपरा चंद्रमा को सोलहों कलाओं से पूर्ण मानती है। खीर रात भर खुले आकाश के नीचे रखी जाती है, क्योंकि माना जाता है कि चंद्र किरणें अमृत लिए होती हैं, और प्रातः उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। पूर्वी भारत में यही रात्रि कोजागरी लक्ष्मी पूजा है — 'को जागर्ति', अर्थात कौन जाग रहा है — जब माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण कर जागने वालों के यहाँ पधारती हैं। ब्रज परंपरा में यह रास पूर्णिमा है, भगवान कृष्ण की रास लीला की रात्रि।
शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) Puja Vidhi
- 1
व्रत संकल्प व लक्ष्मी पूजन
प्रातः संकल्प लें, और संध्या को उदित चंद्रमा की ओर मुख कर श्वेत पुष्प, बताशे व प्रज्वलित दीप से माँ लक्ष्मी का पूजन करें।
- 2
चंद्र अर्घ्य
चंद्रोदय के पश्चात चंद्र देव को जल और श्वेत पुष्पों से अर्घ्य दें, तथा खुले में विषम संख्या में दीप प्रज्वलित करें।
- 3
चंद्रिका में खीर
गाय के दूध और चावल की खीर बनाकर उसे पतले श्वेत वस्त्र से ढकें, और रात भर खुली चाँदनी में रखें।
- 4
रात्रि जागरण व पारण
भजन अथवा लक्ष्मी स्तोत्र के पाठ के साथ जागरण करें, और प्रातः चाँदनी में रखी खीर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) Mantra
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद। श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
Meaning
हे कमले, कमल में निवास करने वाली, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए — महालक्ष्मी को नमस्कार।
How to chant
संध्या पूजन के समय और पुनः रात्रि जागरण में 108 बार जप करें।
