माघ बिहू (भोगाली बिहू)
🗓️ सूर्य का मकर राशि में प्रवेश — माघ का पहला दिन (मध्य जनवरी)
The story behind माघ बिहू (भोगाली बिहू)
माघ बिहू असम में फसल के समापन का पर्व है, उसी दिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे भोगाली बिहू भी कहते हैं, 'भोग' अर्थात भोजन से, क्योंकि इस समय भंडार भरे होते हैं। पूर्व संध्या उरुका को समुदाय मेजी बनाता है — बाँस और फूस की ऊँची रचना — तथा भेलाघर, जिसमें रात भर भोजन और जागरण होता है। प्रभात में मेजी प्रज्वलित की जाती है और अग्नि को प्रथम पीठा तथा चावल अर्पित किए जाते हैं, तत्पश्चात राख खेतों में बिखेरी जाती है।
माघ बिहू (भोगाली बिहू) Puja Vidhi
- 1
उरुका भोज
पूर्व संध्या को भेलाघर में साथ भोजन बनाएँ और खाएँ, तथा बनी हुई मेजी के चारों ओर रात्रि जागरण करें।
- 2
प्रातः स्नान
अग्नि प्रज्वलन से पूर्व, प्रभात में स्नान करें, परंपरा अनुसार नदी में।
- 3
मेजी ज्वलन
प्रथम प्रकाश में मेजी प्रज्वलित करें, अग्नि में पीठा, पान और ऋतु का चावल अर्पित करें, और परिक्रमा करें।
- 4
भस्म व गो सेवा
आने वाली फसल हेतु राख खेतों और फल वृक्षों पर बिखेरें, तथा पशुओं को भोजन कराकर माला पहनाएँ।
माघ बिहू (भोगाली बिहू) Mantra
ॐ अग्नये नमः॥
Meaning
अग्नि देव को नमस्कार, जो अर्पण को वहन करते हैं, और जिनमें फसल का प्रथम भाग अर्पित होता है।
How to chant
मेजी प्रज्वलन के समय तथा अग्नि में प्रथम पीठा अर्पित करते समय जप करें।
