कार्तिक पूर्णिमा (देव दिवाली)
🗓️ कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर)
The story behind कार्तिक पूर्णिमा (देव दिवाली)
कार्तिक पूर्णिमा भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर के तीन उड़ते नगरों के संहार का दिन है, जिससे वे त्रिपुरारि कहलाए, और कहा जाता है कि देवगण कृतज्ञता में काशी उतरकर दीप जलाए — इसीलिए देव दिवाली। यही पूर्णिमा चातुर्मास का समापन करती है, तथा भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य के प्राकट्य और गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। संध्या को गंगा के घाट दीपों की पंक्तियों से सज जाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा (देव दिवाली) Puja Vidhi
- 1
कार्तिक स्नान
सूर्योदय से पूर्व नदी में स्नान करें अथवा उगते सूर्य को जल अर्पित करें — यह मास भर चलने वाले कार्तिक स्नानों का अंतिम और सर्वाधिक पुण्यप्रद दिन है।
- 2
शिव व विष्णु पूजन
त्रिपुरारि शिव को बेलपत्र और श्वेत पुष्प, तथा भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें; इस पूर्णिमा को दोनों का पूजन होता है।
- 3
दीप दान
संध्या को नदी घाट, तुलसी वृंदा अथवा जल पात्र में घी के दीप प्रवाहित करें या रखें — यही इस दिन का मूल कर्म है।
- 4
दान व अन्न दान
जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, घी अथवा आँवला अर्पित करें और गौओं को भोजन कराएँ; इस पूर्णिमा का दान अक्षय पुण्यदायी माना गया है।
कार्तिक पूर्णिमा (देव दिवाली) Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
Meaning
शिव को नमस्कार — पंचाक्षर मंत्र, यहाँ त्रिपुर संहारक त्रिपुरारि के रूप में सम्बोधित।
How to chant
दीप दान के समय जल की ओर मुख कर 108 बार जप करें।
