श्री कृष्ण जन्माष्टमी / गोकुलाष्टमी
🗓️ श्रावण / भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त–सितंबर)
The story behind श्री कृष्ण जन्माष्टमी / गोकुलाष्टमी
श्री कृष्ण जन्माष्टमी योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के मथुरा में मध्यरात्रि में हुए अलौकिक प्राकट्य का महाउत्सव है। भगवान श्री कृष्ण ने भगवद्गीता का अमर ज्ञान दिया और कंस जैसे अनाचारी का वध कर धर्म की स्थापना की। यह व्रत आत्मा में आनंद और भक्ति का संचार करता है।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी / गोकुलाष्टमी Puja Vidhi
- 1
व्रत व कीर्तन
दिन भर उपवास (फलाहार या निर्जला) रखें तथा कृष्ण लीला व भजनों का आनंद लें।
- 2
मध्यरात्रि अभिषेक (जन्म मुहूर्त)
ठीक रात 12 बजे बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) का शंख से पंचामृत व पवित्र जल से अभिषेक करें।
- 3
श्रृंगार व पालना
प्रभु को पीले वस्त्र, मोरपंख और वैजयंती माला से सजाकर पुष्पों के झूले (पालना) में झुलाएं।
- 4
माखन व पंजीरी भोग
प्रभु को उनका प्रिय ताज़ा माखन, मिश्री, धनिया पंजीरी और तुलसी दल का भोग लगाएं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी / गोकुलाष्टमी Mantra
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
Meaning
हे कृष्ण, हे राम, हे भगवान की दिव्य आह्लादिनी शक्ति, कृपया मुझे अपनी सेवा में अंगीकार करें।
How to chant
मध्यरात्रि में भगवान के अभिषेक व पालना उत्सव के समय भावपूर्वक कीर्तन करें।
