गणेश चतुर्थी
🗓️ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त–सितंबर)
The story behind गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश के आविर्भाव का पर्व है, जो विघ्नहर्ता हैं और बुद्धि के दाता हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह उत्सव महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विशेष उल्लास से मनाया जाता है, जहाँ घरों तथा सार्वजनिक मंडपों में मिट्टी की प्रतिमा डेढ़ से दस दिन तक स्थापित की जाती है। पर्व का समापन विसर्जन से होता है — यह स्मरण कि प्रत्येक आकृति अपने मूल में लौटती है, और आरंभ में आमंत्रित विवेक को अनासक्त भाव से धारण करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी Puja Vidhi
- 1
मूर्ति स्थापना व प्राणप्रतिष्ठा
स्वच्छ चौकी पर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें और प्राणप्रतिष्ठा मंत्र से देव का आवाहन करें।
- 2
षोडशोपचार पूजन
जल, वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य — ये सोलह उपचार अर्पित करें, तथा गणेश जी को प्रिय दूर्वा से आरंभ करें।
- 3
मोदक नैवेद्य
इक्कीस मोदक तथा इक्कीस दूर्वादल अर्पित करें, फिर उन्हें प्रसाद रूप में परिवार और आगंतुकों में बाँटें।
- 4
आरती व विसर्जन
जितने दिन प्रतिमा स्थापित रहे, प्रातः और संध्या आरती करें, और अंत में जलाशय अथवा घर के पात्र में विसर्जन करें।
गणेश चतुर्थी Mantra
ॐ गं गणपतये नमः॥
Meaning
गणों के स्वामी गणपति को नमन, जो साधक के मार्ग से समस्त विघ्नों का हरण करते हैं।
How to chant
स्थापना के समय 108 बार तथा प्रत्येक आरती से पूर्व 11 बार जप करें।
