दुर्गा पूजा / विजयादशमी
🗓️ आश्विन शुक्ल दशमी (सितंबर–अक्टूबर)
The story behind दुर्गा पूजा / विजयादशमी
विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी को आती है, जो माँ दुर्गा की छद्मरूपी असुर महिषासुर पर विजय का दिन है, और इसी तिथि को भगवान राम द्वारा रावण वध का स्मरण भी किया जाता है। पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में षष्ठी से दशमी तक पंडालों में देवी की आराधना होती है, और दिन का समापन सिंदूर खेला तथा प्रतिमा विसर्जन से होता है। उत्तर भारत में यह दशहरा के रूप में मनाया जाता है, रामलीला और रावण दहन के साथ। दोनों परंपराएँ एक ही बात कहती हैं — अधर्म स्थायी नहीं, उसका अंत नियत है।
दुर्गा पूजा / विजयादशमी Puja Vidhi
- 1
देवी पूजन व संकल्प
नवमी पूजन पूर्ण कर अपराह्न काल में विजयादशमी का संकल्प लें, जिसे विजय का मुहूर्त माना गया है।
- 2
अपराजिता पूजन
देवी अपराजिता का अपराजिता पुष्पों से पूजन करें, परंपरा अनुसार ईशान कोण में, और इस दिन से आरंभ होने वाले कार्यों में सफलता की प्रार्थना करें।
- 3
आयुध व विद्या पूजन
अपने कार्य के उपकरण, वाहन, यंत्र अथवा पुस्तकें देवी के समक्ष रखें, उन्हें स्वच्छ कर सजाएँ, और अक्षत व पुष्प अर्पित करें।
- 4
शमी पूजन व विसर्जन
शमी वृक्ष का पूजन कर उसके पत्ते सद्भाव के प्रतीक रूप में परस्पर दें; संध्या को प्रतिमा विसर्जन अथवा रावण दहन से समापन करें।
दुर्गा पूजा / विजयादशमी Mantra
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Meaning
जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं — उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें बारंबार नमस्कार।
How to chant
दशमी पूजन के समय तीन बार पाठ करें; यह श्लोक देवी माहात्म्य के स्तोत्र का अंश है।
