श्रीभगवानुवाच | मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः | असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ||७-१||
śrībhagavānuvāca | mayyāsaktamanāḥ pārtha yogaṃ yuñjanmadāśrayaḥ | asaṃśayaṃ samagraṃ māṃ yathā jñāsyasi tacchṛṇu ||7-1||
हे पार्थ ! मुझमें असक्त हुए मन वाले तथा मदाश्रित होकर योग का अभ्यास करते हुए जिस प्रकार तुम मुझे समग्ररूप से, बिना किसी संशय के, जानोगे वह सुनो।।
