श्रीभगवानुवाच | अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः | दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ||१६-१||
śrībhagavānuvāca | abhayaṃ sattvasaṃśuddhirjñānayogavyavasthitiḥ | dānaṃ damaśca yajñaśca svādhyāyastapa ārjavam ||16-1||
श्री भगवान् ने कहा -- अभय, अन्त:करण की शुद्धि, ज्ञानयोग में दृढ़ स्थिति, दान, दम, यज्ञ, स्वाध्याय, तप और आर्जव।।
जीवन में उपयोग
निर्भयता, हृदय की पवित्रता, और ज्ञान प्राप्त करने में दृढ़ता दिव्य गुण हैं। डर से बचकर नहीं, बल्कि हाथ कांपने पर भी सही कार्रवाई करके साहस पैदा करें।
